Kedarnath yatra

 Kedarnath yatra-

केदारनाथ यात्रा का महत्व कब और कैसे जाएं-                 

   Kedar nath yatra -हिंदू धर्म के पवित्र चार धामों में 1 व भगवान भोले के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग गढ़वाल में  मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर समुद्र तल से 3854 मीटर ऊंचाई पर है। केदारनाथ की यात्रा बहुत शुभ व महत्वपूर्ण हिंदू धर्म में मानी जाती है।

  

Kedar nath yatra temple of  Kedarnath          केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास।                                  ।                
महाभारत काल में जब पांडवों ने युद्ध जीत लिया तब उन्हें अपने परिवार जनों को मारने  का बहुत पश्चाताप  वा ग्लानि हो रही थी इस पाप को क्षमा कराने  के लिए वह भगवान शिव के दर्शन करना चाहते थे किंतु भगवान शिव उनको दर्शन ना देकर यहां वहां छिप रहे थे एक बार भगवान शिव केदार घाटी में बैल  के रूप में छिपे हुए थे तब भीम ने उनको पहचाना और उनको पकड़ने का प्रयास किया जिसमें बैँल  का कुबर (hump) केवल भीम के हाथ में रह गया बाकी शिव अंतर ध्यान हो गए तब से इस ज्योतिर्लिंग को केदार ज्योतिर्लिंग के नाम से स्थापित किया गया मंदिर का पुनर्निर्माण आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया।       
Kedarnath yatra temple

                                                                                   
केदारनाथ यात्रा( Kedarnath yatra )कब  शुरू होती है।                                                        
केदारनाथ यात्रा अप्रैल माह के अंत से नंवबर महीने की शुरुआत तक खुला रहता है तथा  शेष 6 महीने यह मंदिर बर्फ से ढका रहता है और पर्यटकों के लिए बंद रखा जाता है  ।                                                                                              
  केदारनाथ यात्रा (Kedarnath yatra)कैसे जाएं?    

                              उत्तराखंड के मनोहर पहाड़ व सुहाना मौसम केदारनाथ यात्रा को अविस्मरणीय बनता है केदारनाथ मंदिर वर्ष में कुछ महीने ही खुला रहता है बाकी समय वह बर्फ से ढका रहता है इसलिए यात्रा में जाने से पहले  सही समय की जानकारीऔर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है ।

    केदारनाथ धाम जाने के लिए ऋषिकेश निकटतम रेलवे स्टेशन है। और हरिद्वार मुख्य स्थान है जहां से आपको भारत के हर बड़े स्टेशन से ट्रेन व हवाई जहाज आसानी से उपलब्ध है हरिद्वार से रुद्रप्रयाग होते हुए गौरीकुंड पहुंचकर वहां से आपको लगभग 18 किलोमीटर की पैदल ट्रैकिंग  करना पड़ता है तभी आप केदारनाथ मंदिर के दर्शन कर पाते हो । गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर जाने के लिए पालकी  व खच्चर भी आसानी से मिल जाते हैं । वर्तमान में केदारनाथ मंदिर के लिए सीधे हरिद्वार से हेलीकॉप्टर की सुविधा उपलब्ध है  किंतु उसके लिए पहले से ही  रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है ।           


 केदारनाथ के समीप अन्य घूमने की जगह।       

           

केदारनाथ मंदिर से 245 किलोमीटर की दूर तक भगवान विष्णु का पुरातन मंदिर है। जिसे बद्रीनाथ धाम कहा जाता है। यह भगवान विष्णु के पवित्र मंदिरों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है केदारनाथ यात्रा के बाद यहां के दर्शन करने से संपूर्ण पुण्य प्राप्त होते हैं       

सोनप्रयाग।                                                  

 मंदाकिनी और वासुकी नदी के मिलने का यह स्थान एक धार्मिक स्थल है जो कि केदारनाथ यात्रा के रास्ते में पड़ता है यहां दोनों नदियों के संगम में स्नान का बहुत महत्व है।   

Son prayag (Kedarnath yatra)
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          गौरी कुंड मंदिर।          

                                    केदारनाथ यात्रा के रास्ते में गौरीकुंड मां पार्वती का मंदिर स्थित है यहां गर्म पानी के कुडं हैं जहां स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। 

Gauri kund 

                                                                                                               वासुकी ताल।      

                                                                      केदारनाथ से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित वासुकी  ताल समुद्र तल से 4135 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यहां पहुंचकर आप झील की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको पहाड़ों पर ट्रैकिंग करना आवश्यक है। 

Kedarnath yatra

     संछिप्त।                                           


केदारनाथ यात्रा एक मनमोहक व  स्वर्णिम एहसास प्रदान करने वाली यात्रा है मंदिर के पीछे बर्फ के  सफेद हिमालय पर्वत में बादलों का रूप बदलना जैसे साक्षात महादेव अपने भक्तों को स्वयं दर्शन दे रहे हो ।उत्तराखंड निवासियों का सहज, सरल स्वभाव यात्रा को सुरक्षित बनता है लोकगीतों, पहाड़ी व्यंजनों और कई औषधीय की प्रचुरता इस क्षेत्र को अलग सी पहचान दिलाती है किंतु यहां का बदलता मौसम व पहाड़ों की ट्रैकिंग के लिए पहले से ही शारीरिक ,मानसिक व चिकित्सकीय तैयारी कर लेना चाहिए व सरकार की दिशा- निर्देशों को पूरी तरह पालन करना चाहिए अन्यथा यह यात्रा पूर्णतया जोखिम भरी हो सकती है                                     The source link ishttps://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5_%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0

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